
वास्तव में पूर्ण भोजन वह है जिसमे सभी प्रकार के आवश्यक पोषकतत्व उपस्थित हो और जिसके द्वारा शरीर की समस्त आवश्यकताये पूरी हो सके । भोजन लेने का उद्देश्य केवल पेट भरना ही नही होता बल्कि पूरे श रीर को पर्याप्त ऊर्जा व शक्ति प्रदान कर्ना भी होता है जिससे वह स्वस्थ ,बलवान और कार्यशील रह सके । उल्टा- सीधा कुछ भी खाकर पेट भर लेने मात्रा से शरीर स्फुर्त नही रह सकता है बल्कि उसे तो तरह -तरह के तत्वो की आश्यकता होती है जिससे उसका सम्पूर्ण पोषण व विकास हो सके ।
अब हम यहाँ उन पोषक तत्वो का विस्तृत वर्णन कर रहे है जो एक सामान्य मनुष्य के भोजन मे अनिवार्य रूप से होने चाहिये । ये पोषक तत्व आँखों से दिखाई तो नही देते परन्तु शरीर के विकास के लियॆ आवश्यक होते है और विभिन्न खाध -पदार्थो मे पाये जाते है ।
प्रोटीन
प्रोटीन शब्द वह शब्द है जो ‘प्रथमीन’ से बना है जिसका अर्थ है – पहला या प्रथम । वस्तव मे प्राणीयो के शरीर मे प्रोटीन का स्थान पहला ही है।हमारे शरीर के रक्त ,मान्श और मस्तिष्क की कार्य -क्षमता प्रोटीन का परिणाम होते है । प्रोटीन शक्ति देता है ,शरीर की वृद्धि व विकास करता है और रोगो से लड़ने की शक्ति देता है। प्रोटीन के द्वारा पाचक रसो की उत्पत्ती होती है और शरीर के नष्ट हो चुके या टूटे-फूटे तन्तुओ का निर्मण भी प्रोटीन ही करती है। शरीर मे प्रोटीन की कमी हो जाने पर मनुष्य की ऑक्सीजन लेने की शक्ति नष्ट हो जाती है जिससे रोगाणु शीघ्रता से शरीर मे प्रवेश होकर मनुष्य को रोगी बना देते है । अत: शरीर मे प्रोटीन की कमी नही होनी चाहिये।

प्रोटीन के प्रमुख श्रोत
आगे लिखे पदार्थो मे प्रोटीन विशेष रूप से पाया जाता है -गेहूँ,जौ,मक्का,अरहर की दाल ,सोयबीन,बादाम,काजू,मूंगफली,दूध,मक्खन आदी ।
विटामिन
विटामिन हमारे पूर्ण भोजन के आवश्यक तत्व है । वैसे तो विटामिन से शरीर को उर्जा प्राप्त नही होती लेकिन यह आंतरिक शारीरिक प्रक्रियाओ मे तीव्रता लाकर शरीर को गतिशील बनाये रखते है ।वास्तव मे ,विटामिन एक प्रकार के रासायनिक पदार्थ है जो भोज्य- पदार्थ मे उपस्थित रहते है । विटामिन को विभिन्न वर्गो मे बाटा जा सकता है जिसका विवरण इस प्रकार है –
विटामिन ‘ए’– इसके द्वारा शरीर अधिक बलवान होता है ,हड्डी मजबूत और पुष्ट होती है और शारीरिक श्रम करने के प्रति उत्साह बना रहता है। आँखों के स्वास्थ्य के लिए इस्कि बहुत आवश्यक्ता होती है । इसकी कमी से रतौन्धी ,हड्डियों का टेढ़ापन ,शरीर दुबला व कमजोर होना,शरीर पीला पड़ जाना आदि हो सकते है । विटामिन ‘ए’ मुख्यता : गाजर ,टमाटर ,हरी पत्तेदार सब्जियां ,दूध और मक्खन,सोयाबीन,
गेहूँ ,चना व अरहर आदि खाद्य पदार्थ मे पाया जाता है ।

विटामिन ‘बी‘ – विटामिन ‘बी’ को पुन: विटामिन ‘बी1,बी2,’बी3′,बी6,’बी12’ आदि उपभागो मे बाटा जाता है। इसकी कमी से बेरी-बेरी ,हृदय का कमजोर हो जाना ,अरुची,लो ब्लड प्रेशर सदैव आल्सय बने रहना ,चिड़चिड़ापन आदि रोग हो जाते है । विटामिन बी मुख्यता: हरी सब्जिया ,मटर,गोभी,सेम,गेहूँ के ज्वारे ,चावल,सोयबीन ,मक्का,दूध और पनीर आदि मे पाया जाता है ।
विटामिन ‘सी’– इस्के द्वारा शरीर का रक्त शुद्ध रहता है,दाँत व अस्थियां मजबूत बने रहते है और रक्तवाहीनी नलिकाये लाचीली बनी रहती है। शरीर मे इसकी कमी हो जाने पर स्कर्वी,पायोरिया,दाँत व हड्डियों का कमजोर हो जाना ,मसूड़े फूलना, मस्तिष्क कमजोर पड़ना,शरीर पर रुखे -सूखे चकत्ते पड़ जाना और सिर मे रूखापन आदि रोग हो जाते है। विटामिन’सी’ मुख्यता: खट्टे पदार्थ मे पाये जाते है जैसे -संतरा,आंवला,नीबू आदि के साथ ही चना,मूंग,टमाटर,सेम ,मूली,अन्नानस,पपीता,सेब आदि मे भी पाया जाता है।
विटामिन ‘डी‘ – इस्के द्वारा शरीर की हड्डियाँ और आंतें मजबूत बनी रहती है । इसकी कमी से कमर ,जांघ और रीढ़ की हड्डी मे पीड़ा होने लगती है और रिकेट्स नामक रोग हो सकता है । बच्चो मे इसकी कमी से सूखा रोग हो जाता है जो उनको पूरे जीवन परेशान करता है।इसके लिये धूप सबसे बढ़िया श्रोत है । घी,पनीर ,मक्खन,गेहूँ,मक्का ,टमाटर आदि मे भी यह प्र्चूर मात्रा मे पाया जाता है ।

विटामिन ‘ई‘ – इसके द्वारा पुरुषों मे पुरुषत्व और महिलाओ मे नारित्व बना रहता है। अगर इसकी कमी पायी गयी तो महिलाये गर्भ धारन नही कर पाती है।इससे निजात पाने का सबसे सही उपाय अंकुरित चना और गेहू है ।विटामिन ‘ई’ की कमी होने पर मैदा ,बारीक पिसा आटा आदि वस्तुओ से परहेज करना चाहिये ।
विटामिन ‘के’ – इसका मुख्य कार्य रक्त को जमाने यानी थक्का बनाने मे सहायता करना है। शरीर मे इसकी कमी हो जाने पर नकसीर आदि रूप मे रक्त -स्त्राव होना, चोट लगने पर रक्त बहना,शीत पित्त आदि रोग हो सकते है। विटामिन ‘के‘ मुख्य रूप से गोभी ,पालक ,आलू,टमाटर,मक्खन, दूध,गेहूँ के आटे की भूसी आदि मे पाया जाता है।
कार्बोहाइड्रेटस
कार्बोहाइड्रेटस भी एक प्रमुख पोषक तत्व है। इसका मुख्य काम शरीर को उर्जा ,शक्ति व स्फूर्ति प्रदान करता है। इस्के द्वारा मांसपेशियों की क्रियाशीलता उत्त्तम बनी रहती है। शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्तियो जैसे- मजदूर,कुली,किसान आदि को कार्बोहाइड्रेट-युक्त पदार्थो का सेवन पर्याप्त मात्रा मे करना चाहिये। शरीर मे इसकी कमी हो जाने पर थकान ,आलस्य,दम फूलना,घबराहट ,सिर चकराना आदि सिकायते हो सकती है। इसके लिये गेहूँ ,चना ,जौ,चावल ,विभिन्न दाले ,आलू,आम,केला,किशमिश,खजूर,शहद,गुड़ आदी में पाया जाता है |

वसा
चिकनाई ही वासा कहलाती है। सर्दी -गर्मी से शारीर को बचाना वसा का काम है ,बाहरी आघातों से रक्षा करना ,शरीर के जोड़ो को सक्रिय बनाये रखती है और शरीर में शक्ति ,उर्जा और ताप बनाये रखती है ।हमारे शरीर में वसा का काम शारीर को सुडौल ,चमकीला और पुष्ट बनाये रखना है ।अगर शारीर में वसा की कमी आ जाती है ,सूखी ,कमजोर और जोड़ो में दर्द महसूस होने लगता है लेकिन शरीर में वसा के अधिक हो जाने पर शरीर मोटा, भद्दा और चर्बीदर हो जाता है| इसलिए वसा का प्रयोग सही मात्रा में करनी चाहिए कम और ज्यादा नहीं /जो लोग दिनभर शारिरक श्रम अधिक करते है उन्हें वसा की जरूरत होती है ,वैसे लोगो को वसा युक्त भोजन अधिक करना चाहिए ।वसा मुख्या रूप से मूंगफली ,दूध ,मक्कखन ,सोयाबीन ,घी ,तिल ,नारियल ,बादाम,पिस्ता,अखरोट ,काजू आदि में पाया जाता है ।
खनिज -लवण
हमारे शारीर के विकास और पोषण के लिए खनिज लवण बहुत जरूरी है । नीचे विभिन्न प्रकार के खनिज लवण-लवण का वर्णन किया गया है।
कैल्शियम -कैल्शियम हमारे दातो और हड्डियों के लिए बहुत ही प्रमुख है ,ये दातो और हड्डियों को मजबूती प्रदान करते है ।गर्भवती महिलाओ ,बच्चो और स्तनपान करने वाली महिलाओ को कैल्शियम की अधिक जरुरत होती है ।शारीर में केल्शियम की कमी होने पर हड्डिया और दात दोनों कमजोर हो जाते है ,शारीर पर दाग और चरम रोग की शिकायत हो जाती है ।बहुत से छोटे बच्चे इसकी कमी के कारन मिटटी कहने लगते है ।कैल्शियम मुख्या रूप से दूध ,मठा,दही,पनीर ,मक्खन ,टिल, अरहर ,पत्तागोभी ,गाजर,गन्ना,संतरा ,शलजम में पाया जाता है ।
फास्फोरस – हड्डियों और दातो की मजबूती के लिए जैसे कैल्शियम की जरुरत होती है उसी प्रकार फास्फोरस की भी जरुरत होती है।इसके अतिरिक्त रक्त को शुद्ध करने में भी इसकी आवश्यकता होती है ।जिस अंग से संतान की उत्पत्ति होती है उस अंग पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है ।शारीर में इसकी कमी हो जाने पर हड्डिया और दात कमजोर हो जाते है और शारीर में विकार उत्पन्न हो जाता है ।फास्फोरस मुख्या रूप से दूध,दही ,पनीर ,सोयाबीन ,उड़द ,चना मुंग ,बाजरा ,गेहूं,हरी सब्जिया और बादाम में पाए जाते है ।

आयरन -आयरन का अर्थ ही लोहा है जैसा की नाम से ही स्पस्ट हो रहा है ।हमारे शारीर में जो लाल रक्त कणिकाओ (हिमोग्लोबीन)का निर्माण होता है आयरन उसमे सहायता प्रदान करता है ।अगर हमारे शरीर में आयरन की कमी होती है तो रक्त की कमी (अनीमिया ),पीलापन ,आलस्य ,उदासी ,काम करने में मन न लगाना ,तुरंत थक जाना आदि रोग पैदा हो जाते है ।आयरन मुक्य रूप से पालक ,मैथी,पोदीना ,करेला,टमाटर ,अंगूर,अरहर ,चना ,उड़द ,सोयाबीन आदि में पाया जाता है ।
मैग्नीशियम-शरीर को सक्रिय बनाये रखने के लिए आयरन के साथ मैग्नीशियम मिलकर काम करती है । शरीर में वृधि और विकास इसके द्वारा ही होता है ।अगर हमारे शरीर में इसकी कमी होती है तो पेशियों और तंत्रिकाओ के कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है ।हरी पत्तेदार सब्जियो ,गेहूं के चोकर और चावल में मुख्यता मैग्नीशियम पाया जाता है ।
पोटेशियम -शारीर में जो भी कोशिकाओ का निर्माण होता है उसके लिए यह अत्यंत आवश्यक है ।अगर शारीर में इसकी कमी पाई जाये तो शारीर को शारीरिक दुर्बलता और थकन का सामना करना पड़ता है ।अगर पोष्टिक खाद पदार्थो का सेवन किया जाये तो इसकी कमी दूर हो सकती है।
सल्फर -गंधक ही सल्फर कहलाता है ।इसका मुख्या कार्य तंत्रिकाओ और पेशियों की क्षमता बनाये रखना और उत्तको की वृधि में सहायता करना है ।मेथी,कला नमक,विविध प्रकार की दालो और अनोजो में पाया जाता है ।

कॉपर -कॉपर को तम्बा भी कहा जाता है ।कॉपर का कार्य एंजाइम का निर्माण करना है ।जिस व्यक्ति में इसकी कमी पाई जाती है उस व्यक्ति को भूख नहीं लगती और शारीरिक विकाश रुक जाता है ।वैसे तो सब्जी ,दाल और अनाज में यह मिल जाता है पर अगर व्यक्ति तांबे के पात्र में 6-8 घंटे रखे हुए पानी को पिए तो इसकी पर्याप्त पूर्ति हो जाती है |
आयोडीन– इसका गर्दन की चुल्लिक्का -ग्रंथि थइराक्किन पर विशेष प्रभाव पड़ता है।अगर शरीर में इसकी कमी होती है, तो घेंगे नामक रोग हो जाता है। इसके अलावा इसकी कमी से बच्चो का विकास रुक जाता है ,चेहरा सूज जाता है ,शरीर की आकृति बिगड़ जाती है ,बाल झड़ने लगते है ।स्तनपान करने वाली महिलाओ को और गर्भवती महिलाओ को आयोडीन की अधिक जरुरत होती है ।आयोडीन प्रचूर मात्रा में समुंद्री नमक ,हरी सब्जियों में और कॉड -लिवर ऑयल में पाया जाता है ।

पोषक तत्वों से सम्बंधित जानकारियों की सारिणी
ऊपर दिए पोषक तत्त्वों से सम्बंधित जानकारियों को सूची के रूप में पुनः दिया जा रहा है ताकि पुस्तक पढने वालो को आसानी हो ।
पोषक तत्त्व
प्रोटीन के प्रमुख कार्य -शारीर की वृधि और विकास करना,नस्त हो चुके तंतुओ की मरम्मत करना ।
अभाव में होने वाले रोग -कुपोषण,बार -बार बीमार पड़ना ।
प्राप्ति के प्रमुख श्रोत – गेहूं, जौ ,मक्का ,दाले ,सोयाबीन ,दूध ,पनीर,मूंगफली आदि ।
विटामिन’ए’
प्रमुख कार्य -शारीर का पोषण करना, आँखों व त्वचा को स्वस्थ रखना ।
अभाव में होने वाले रोग – रतौंधी ,आँखों का कमजोर होना ।
प्राप्ति के प्रमुख श्रोत -गाजर,टमाटर ,हरी सब्जिया,पीले फल ,दूध,मक्खन ।
विटामिन ‘बी ‘
प्रमुख कार्य -शारीरिक श्रम के लिए शक्ति देना ,ह्रदय को स्वस्थ रखना ,मांस -पेशियों को स्वस्थ रखना ।
अभाव में होने वाले रोग – बेरी-बेरी ,ह्रदय का कमजोर होना ,आलस्य और चिडचिडापन ।
प्राप्ति के प्रमुख श्रोत -हरी सब्जिया ,गेहूं ,दाल ,मूंगफली ,दूध ,तिल |

विटामिन ‘सी ‘
प्रमुख कार्य -दात व हड्डियों को मजबूत बनाना ,रक्तवाहिनी नालिकाओ को लचीला बनाना।
अभाव में होने वाले रोग -स्कर्वी ,पायरिया ,मसूढ़े फूलना ,मस्तिष्क कमजोर होना ।
प्राप्ति के प्रमुख श्रोत – खट्टे व रसदार फल-निम्बू ,संतरा ,आंवला आदि।
विटामिन ‘डी ‘
प्रमुख कार्य -हड्डियों को मजबूत रखना /त्वचा की रछा करना ।
अभाव में होने वाले रोग-रिकेटस ,सूखा -रोग ।
प्राप्ति के प्रमुख श्रोत– सूर्य की रोशनी ,दूध,पनीर,मक्खन ।
विटामिन ‘ई ‘
प्रमुख कार्य -प्रजनन शक्ति बनाये रखना ।
अभाव में होने वाले रोग – नपुंसकता ,बाँझपन ।
प्राप्ति के प्रमुख श्रोत -अंकुरित अनाज ।
विटामिन ‘के ‘
प्रमुख कार्य -रक्त का थक्का ज़माने में मदद करना ।
अभाव में होने वाले रोग -शारीर के किसी अंग से निकलने वाले रक्त श्राव न रुक पाना ।
प्राप्ति के प्रमुख श्रोत-दूध ,मक्खन ,चोकर-युक्त आटे की रोटी ।

कार्बोहाइड्रेटस
प्रमुख कार्य -शारीर को ऊर्जा और शक्ति प्रदान करती है ।
अभाव में होने वाले रोग -किसी भी कार्य करने में कमजोरी और थकान महसूस होना ।
प्राप्ति के प्रमुख श्रोत -आलू ,केला,चावल ,शहद ,खजूर,शकरकंदी ।
वसा
प्रमुख कार्य – शारीर में ताप उत्पन्न करना,जोड़ो को सक्रिय बनाये रखना,शरीर को बाहरी आघातों से रक्षा करना ।
अभाव में होने वाले रोग -शारीर में कमजोरी आना ,जोड़ो में विकार ।
प्राप्ति के प्रमुख श्रोत दूध,पनीर ,मक्खन ,घी ,सोयाबीन ,मूंगफली,सरसों ,बादाम ,पिस्ता ।
व्यक्ति का पूर्ण भोजन
पूर्ण भोजन के पोषक तत्वों के वर्णन को पढने के बाद यह सवाल उठता है कि आखिर पूर्ण भोजन क्या होता है और एक व्यक्ति के पूर्ण पोष्टिक भोजन में क्या -क्या पदार्थ शामिल होने चाहिए ? तो इसका उत्तर यह होगा कि पूर्ण भोजन में वो सभी पदार्थ होने चाहिए जिससे मनुष्य को सभी पोषक तत्वों कि प्राप्ति हो सके ।अनाजो में इस प्रकार के पदार्थ है -गेहूं ,चावल,मक्का,बाजरा ,चना,सोयाबीन । दालो में – मूंग ,अरहर,मसूर ।सब्जियों में -गाजर,मूली ,टमाटर,पालक ,गोभी,करेला ,आवला ,टिंडे,नीबू,प ,परवल आदि । फलो में -अमरूद,अनार ,आम ,अंगूर ,खीरा, पपीता ,केला ,संतरा आदि ;अन्य पदार्थो में दूध ,दही ,मक्खन ,मट्ठा ,शहद आदि । ऊपर लिखे शब्दों करत यह हुआ कि हर व्यक्ति को अपने उम्र के अनूसार प्रत्येक दिन पौष्टिक खाद-पदार्थ का सेवन करना चाहिए ।अगर मनुष्य विविध प्रकार के पौष्टिक पदार्थ का सेवन करता है तो शरीर में पोषक तत्वों कि पर्याप्त मात्रा बनी रहती है तथा मानसिक और शारीरिक विकास होता है ।
देहाती उत्पाद www.dehatimall.online पर उपलब्ध है।
डा० नैयर आजम एवं डा० डी० एन० प्रसाद नेचरोपैथी
